विदर्भ के ग्यारह जिलों के साथ देशभर में सिंचाई योजना सुधार आवश्यक
-अन्न उत्पादन में भारत को प्रथम क्रमांक पर लाने के लिए कृषि पाठ्यक्रम जरुरी
नागपुर.(आनंदमनोहर जोशी) विदर्भ के नागपुर सहित ग्यारह जिलों के साथ भारत के लाखों गांवों की जमीन को उपजाऊ बनाने के प्रयास देश के केंद्रीय कृषि मंत्रालय को अतिशीघ्र करना ही होगा. देश में समय समय पर अच्छी बारिश भारत में तकनीकी कर्मियों,अधिकारियों की नाकामी के चलते ग्रामीण इलाकों की नदियों,नालियों,तालाबों और नहरों के व्यवस्थित नहीं होने से सिंचाई व्यवस्था डगमगा रही है.इसे देखते हुए राष्ट्रिय नहर योजना,राष्ट्रीय नदी जोड़ो योजना पर विचार करके भारत जैसे कृषि प्रधान देश को अन्न उत्पादन के प्रथम क्रमांक पर लाया जा सकता है.वैसे तो दुग्ध उत्पादन में भारत प्रथम क्रमांक पर है.हाल ही में राजस्थान की एक सभा में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदीजी ने गुजरात द्वारा नर्मदा नदी के जल को राजस्थान को देने की महत्वपूर्ण जानकारी जनता को चुनावी जनसभा में दी है. वहीँ भारत के कर्नाटक और महाराष्ट्र की नदी के जल को आपस में वापरने पर विवाद बना रहता है.देश में बिना किसी भेदभाव के चलते अब विदर्भ को भी न्याय दिलाना जरुरी है. 75 वर्षों में मराठवाड़ा,कोंकण क्षेत्र का विकास नेताओं ने किया.वर्तमान समय में भारत सरकार को प्राकृतिक बरसात से निपटने के लिए गाँव गाँव और क़स्बे कस्बे में सिंचाई व्यवस्था के इंतजाम करना होगा इसके लिए कक्षा एक से स्नातक तक कृषि का नया पाठ्यक्रम तैयार करके देश के विद्यार्थियों को कृषि,बागवानी की शिक्षा देनी होगी. आज गाँव की खेती छोड़कर लाखों किसान शहर आ चुके है.भारत जैसे कृषि प्रधान देश में जहाँ 120 दिन में चावल की फसल तैयार होती है.अन्य अनाज,तिलहन की फसलों को भी मुश्किल से तैयार किया जाता है.देश के अनेक हिस्सों में रोजाना अन्न जूठा छोड़ा जाता है. भारत को एक क्रमांक का अन्न उत्पादक क्षेत्र बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार किसानों,बंजर जमीनों की तरफ ध्यान देकर शिक्षाप्रद कार्यक्रमों को तैयार करें तो बेहतर होगा. हाल ही में देश के अनेक हिस्सों में आ रही बाढ़ के जल को व्यवस्थित जमीन में एकत्रित करने कृषि अभियान्त्रिक शिक्षा को बढ़ावा देना होगा.

